C.P. राधाकृष्णन भारत के नए उपराष्ट्रपति का सफर।

C.P. राधाकृष्णन भारत के नए उपराष्ट्रपति का सफर।
C.P. राधाकृष्णन भारत के नए उपराष्ट्रपति का सफर।

भारत का लोकतंत्र अपनी विविधता और समावेशिता के लिए जाना जाता है। यहां हर नागरिक को आगे बढ़ने का अवसर मिलता है। इसी लोकतांत्रिक प्रणाली का एक महत्वपूर्ण पद है उपराष्ट्रपति, जो न केवल राज्यसभा के सभापति होते हैं, बल्कि राष्ट्रपति के बाद देश का दूसरा सबसे ऊँचा संवैधानिक पद भी संभालते हैं। हाल ही में इस प्रतिष्ठित पद पर आसीन हुए हैं C.P. राधाकृष्णन, जिन्होंने अपने अनुभव, सादगी और संघर्षशीलता से यह मुकाम हासिल किया।

C.P. राधाकृष्णन का प्रारंभिक जीवन और शिक्षा

C.P. राधाकृष्णन का जन्म 20 अक्टूबर 1957 को तमिलनाडु के तिरुपुर में हुआ। बचपन से ही वे पढ़ाई और खेलों में प्रतिभाशाली रहे। उन्होंने बी.बी.ए. (Bachelor of Business Administration) की पढ़ाई पूरी की। कॉलेज के दिनों में वे टेबल टेनिस चैंपियन और लंबी दूरी के धावक भी रहे, जिसने उनके अनुशासन और दृढ़ निश्चय को और मजबूत किया।

राजनीतिक सफर की शुरुआत

राधाकृष्णन का राजनीतिक करियर बहुत ही कम उम्र में शुरू हुआ। वे 17 साल की उम्र में आरएसएस (Rashtriya Swayamsevak Sangh) से जुड़ गए। बाद में उन्होंने भाजपा का दामन थामा और धीरे-धीरे एक मजबूत संगठनकर्ता के रूप में पहचाने जाने लगे।

वे 1998 और 1999 में कोयंबटूर से लोकसभा सांसद चुने गए। 2003 में उन्हें संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिला। इसके अलावा, उन्होंने भाजपा तमिलनाडु प्रदेश अध्यक्ष के रूप में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

राज्यपाल के रूप में कार्यकाल

साल 2023 में उन्हें झारखंड का राज्यपाल नियुक्त किया गया। इसके बाद 2024 में वे महाराष्ट्र के राज्यपाल बने। महाराष्ट्र में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई संवैधानिक और सामाजिक मुद्दों पर गंभीर पहल की। उनकी छवि एक जिम्मेदार और ईमानदार प्रशासक की रही।

उपराष्ट्रपति चुनाव और जीत

सितंबर 2025 में हुए उपराष्ट्रपति चुनाव में राधाकृष्णन को एनडीए (NDA) की ओर से उम्मीदवार बनाया गया। चुनाव में उन्होंने विपक्षी उम्मीदवार बी. सुदर्शन रेड्डी को हराकर शानदार जीत दर्ज की। उन्हें 452 वोट मिले, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी को 300 वोट मिले। उनकी जीत ने यह साबित किया कि उनके प्रति राजनीतिक दलों और सांसदों का विश्वास कितना मजबूत है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उनकी जीत पर खुशी जताई और उन्हें एक ऐसा नेता बताया जो “खेलों में निपुण हैं, लेकिन राजनीतिक खेलों से दूर रहते हैं।”

C.P. राधाकृष्णन का महत्व और भविष्य की भूमिका

भारत के 15वें उपराष्ट्रपति के रूप में C.P. राधाकृष्णन का दायित्व बहुत बड़ा है। वे राज्यसभा के सभापति के रूप में संसद की कार्यवाही को सुचारू रूप से चलाने और लोकतांत्रिक मूल्यों को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

उनका लंबा राजनीतिक अनुभव, संगठनात्मक क्षमता और सादगीपूर्ण व्यक्तित्व उन्हें इस पद के लिए और भी उपयुक्त बनाता है। दक्षिण भारत से आने वाले एक वरिष्ठ नेता के रूप में वे राष्ट्रीय राजनीति में संतुलन और नई ऊर्जा लेकर आएंगे।

निष्कर्ष

C.P. राधाकृष्णन का सफर यह दर्शाता है कि संघर्ष और ईमानदारी से कोई भी ऊँचाई पाई जा सकती है। उनका जीवन युवाओं और राजनीतिक कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। आने वाले समय में उनसे देश को सकारात्मक और लोकतांत्रिक दिशा मिलने की उम्मीद है।

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